RTE Ka Full Form क्या है? | RTE Full Form in Hindi

दोस्तों, इस पोस्ट में हमने आपको आरटीई क्या है, RTE ka full form क्या होता है, RTE full form in Hindi क्या है, आरटीई कब लागू किया गया था ऐसे कई सवालो के जवाब दिए हैं जिन्हें जानना आपके लिए बेहद जरुरी है।

अगर आप एक भारतीय नागरिक है तो आपको ये पता होना चाहिए कि हमारे देश के सविधान मे कौन-कौन से अधिकार का जिक्र किया गया है। हमारे देश के सविधान मे भारतीय नागरिकों को जो मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं वह हमारे लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्हीं के आधार पर हम अपने अधिकारों की मांग कर सकते हैं।

आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे ही अधिकार अधिनियम की जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं और उसका नाम है – RTE. क्या आपने कभी आरटीई (RTE) का नाम सुना है? यदि नहीं तो आप हमारे संविधान के सबसे महत्वपूर्ण अधिनियम से अनभिज्ञ है।

यहां हम आपको आरटीई के फुल फॉर्म (RTE Full Form In Hindi) से लेकर आरटीई से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप इस पोस्ट को आखिर तक पढ़े।

तो आइए सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि आरटीई का फुल फॉर्म क्या है (RTE Ka Full Form).

RTE Ka Full Form क्या है? (RTE Full Form in Hindi)

RTE Ka Full Form

RTE का फुल फॉर्म Right To Education होता है, जिसे हिंदी में शिक्षा का अधिकार अधिनियम कहा जाता है।

R: Right

T: To

E: Education

शिक्षा का अधिकार अधिनियम एक ऐसा प्रावधान है जिसके अंतर्गत भारतीय नागरिकों को शिक्षा का अधिकार दिया गया है। सिर्फ यही नहीं बहुत सारे महत्वपूर्ण बिंदु शिक्षा के अधिकार अधिनियम से जुड़े हुए हैं जिसकी समस्त जानकारी यहां आपको दी जाएगी।

आइए सबसे पहले जानते हैं कि आरटीई (RTE) क्या होता है क्योंकि इसे समझे बिना आप इसके अन्य बिंदुओं को नहीं समझ पाएंगे।

RTE क्या है?

हमारे देश के संविधान के आर्टिकल 21(A) में प्रावधान किया गया है कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य और नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। इस आर्टिकल को ही आरटीई एक्ट अर्थात राइट टू एजुकेशन (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) कहा जाता है।

निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को आरटीई अधिनियम के शीर्षक में शामिल किया गया है जिसका मतलब यह है कि 6 से 14 वर्ष तक के जो बच्चे अपनी प्रारंभिक शिक्षा को जारी रखने में असमर्थ है अर्थात किसी कारण वश वे अपने शिक्षा को जारी नहीं रख पाते उन्हें शिक्षा का अधिकार मिलेगा, जिसमें किसी भी फीस या अन्य शुल्क का भुगतान उन्हें नहीं करना होगा।

इसके अंतर्गत यह भी निर्धारित है कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को यूनिफॉर्म, बुक ट्रांसपोर्टेशन या मिड डे मील के लिए कोई खर्च नहीं देना होगा।

सिर्फ इतना ही नहीं इस अधिनियम के अंतर्गत 6 से 14 साल के बच्चों को ना तो क्लास में फेल किया जा सकता है और ना ही उन्हें स्कूल से निकाला जा सकता है। इस अधिनियम का उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा को अनिवार्य करना है जिसके तहत निजी शैक्षणिक संस्थानों में 25 फ़ीसदी सीटें पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए आरक्षित की गई हैं।

इस अधिनियम के लागू होने से पहले करीबन 80 लाख बच्चे ऐसे थे जो प्रारंभिक शिक्षा से वंचित थे और आरटीई एक्ट के लागू होने के बाद 2015 तक इन्हें प्राथमिक शिक्षा दिलाने का लक्ष्य रखा गया था।

इस एक्ट के लागू होने के बाद भारत देश 135 देशों की सूची में शामिल हो चुका है जहां बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान लागू किया गया है वहीं विकलांग बच्चों के लिए भी इस प्रावधान के अंतर्गत 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा का आदेश दिया गया है।

इससे समझा जा सकता है कि यह अधिनियम किस तरह हमारे देश के भविष्य के लिए एक आधारभूत ढांचा तैयार करता है। संविधान के 86 वें संशोधन के पश्चात प्राथमिक शिक्षा को सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य बना दिया गया है, आइए जानते हैं कि RTE को कब लागू किया गया था।

RTE कब लागू किया गया था?

शिक्षा का अधिकार अधिनियम एक ऐसा अधिनियम है जो की बच्चों की शिक्षा को अनिवार्य बनाने के लिए लागू किया गया है। 4 अगस्त 2009 को संसद में इसे पारित किया गया जो 1 अप्रैल 2009 को संपूर्ण भारत में लागू हुआ था, लेकिन इसमें जम्मू-कश्मीर शामिल नहीं था।

इस अधिनियम के अंतर्गत नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक को 2009 में पारित किया गया, जिसके पश्चात बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त होने लगी। यह अधिनियम बच्चों के शिक्षा अधिकार के हर एक मानदंड को पूरा करता है।

आइए जानते है कि इससे जुड़े प्रमुख बिंदु अर्थात प्रमुख बातें कौन सी है।

RTE के कुछ प्रमुख बिंदु

आरटीई अधिनियम के अंतर्गत बहुत सारे प्रावधान शामिल हैं जिसका पालन करते हुए शिक्षा को व्यवस्थित किया जाना है इससे जुड़े प्रमुख बिंदु कुछ इस प्रकार है:-

  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा में निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान लागू किया गया है।
  • इसके अंतर्गत जो नियम लागू किए गए हैं वह केवल 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए है।
  • जब से यह अधिनियम लागू हुआ है तब से निजी स्कूलों मे 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों में 25% बच्चे जो पिछड़े वर्ग से है, उन्हें मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान जारी किया गया है।
  • निशुल्क शिक्षा प्रदान करने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
  • कई विद्यालय ऐसे हैं जहां बच्चों के एडमिशन से पहले माता-पिता का इंटरव्यू भी लिया जाता है लेकिन इस शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत इस नियम को बदलने की मांग भी की गई है।
  • 6 से 18 वर्ष की आयु के विकलांग बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार दिया गया है।
  • आरटीई एक्ट के अंतर्गत यह भी निर्धारित है कि यदि कोई मान्यता रद्द विद्यालय चलाता है तो उसे 1 लाख का जुर्माना इस अधिनियम के अंतर्गत देना होगा।
  • आरटीई के अंतर्गत यह भी निर्धारित है कि स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक ट्यूशन नहीं पढ़ा सकते।
  • बच्चों को यह अधिकार है कि वे अपने उम्र के हिसाब से किसी भी स्कूल में एडमिशन ले सकते हैं।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों पर होने वाले शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न को इस अधिनियम के तहत रोक दिया गया है।

RTE Act का उल्लंघन करने पर दंड

राइट टू एजुकेशन एक्ट के अंतर्गत कुछ ऐसे प्रावधान भी जारी किए गए हैं जिनका उल्लंघन करने पर आपको दंड मिल सकता है।

आइए जानते हैं कि इसके तहत कौन-कौन से दंड दिए जाने का प्रावधान है:-

  • राइट टू एजुकेशन एक्ट के अंतर्गत 6 वर्ष से लेकर 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है, अगर कोई इस अधिकार का उल्लंघन करता है तो इसके लिए दंड का प्रावधान है।
  • यदि कोई प्राइवेट स्कूल 6 से 14 वर्ष आयु के गरीब बच्चों को आरक्षित सीटों में से सीट प्रदान नहीं करता या फिर उनसे फीस की मांग करता है तो उस फीस का 10 गुना जुर्माना स्कूल पर लगाया जाता है।
  • ऐसे में स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
  • यदि किसी विद्यालय की मान्यता रद्द की गई है लेकिन फिर भी उस स्कूल को संचालित किया जा रहा है तो उस पर 1 लाख का जुर्माना लगाया जाता है।
  • इसके अलावा हर दिन 10 हज़ार का अतिरिक्त जुर्माना भी संबंधित स्कूल को चुकाना पड़ता है।
  • यदि कोई विद्यालय बच्चों के एडमिशन के पूर्व माता-पिता का इंटरव्यू लेता है तो उस पर 25,000 का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
  • यदि संबंधित स्कूल इस गलती को फिर से दोहराता है तो जुर्माने की राशि को दोगुना करके 50,000 का जुर्माना लिया जाता है।

RTE से जुड़े सवाल जवाब (FAQS)

RTE का मतलब क्या होता है?

RTE का मतलब है Right to Education, जिसे हिंदी में शिक्षा का अधिकार कहते हैं।

आरटीई से किसे फायदा होगा और कैसे?

आरटीई के अंतगर्त 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है, जिससे पिछड़े वर्ग के सभी बच्चों का पढ़ने का अधिकार प्राप्त हो सके।

RTE कब लागू किया गया?

RTE को 4 अगस्त 2009 को संसद में पारित किया गया था, जो 1 अप्रैल 2009 को संपूर्ण भारत में लागू हुआ।

आरटीई क्यों महत्वपूर्ण है?

RTE अधिनियम में पिछड़े या फिर कमज़ोर वर्ग के बच्चो को जिनकी उम्र 6 से 14 वर्ष है उन्हें निःशुल्क प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने का अधिकार दिया गया है। इस अधिनियम के अंतगर्त 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को यूनिफॉर्म, बुक ट्रांसपोर्टेशन या मिड डे मील के लिए कोई खर्च नहीं देना होगा।

निष्कर्ष – RTE Ka Full Form

दोस्तों, इस पोस्ट में हमने आपको RTE क्या है, RTE ka full form क्या होता है, RTE full form in Hindi क्या है, आरटीई कब लागू किया गया था इससे जुड़ी और भी जानकारी शेयर की है।

पोस्ट से जुड़ा आपका कोई सवाल है या फिर आप कुछ पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हम आपके कमेंट का रिप्लाई करने की जल्द से जल्द कोशिश करेंगे।

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