FDI Ka Full Form in Hindi & English | एफडीआई क्या है?

आज का हमारा विषय है एफडीआई (FDI) जहां हम आपको बताने वाले हैं एफडीआई का फुल फॉर्म क्या है (FDI Ka Full Form in Hindi & English) और एफडीआई से संबंधित संपूर्ण जानकारी।

आपके मन में क्या कभी यह सवाल आया है कि क्या विदेशी कंपनियां भारत देश में निवेश कर सकती है? यदि हां, तो क्या आपने इस सवाल का जवाब पाने के लिए गूगल पर सर्च करके देखा कि किस तरह विदेशी कंपनियां भारत देश में निवेश करती है?

अगर आपने कभी ऐसा किया है तो आपके सामने एफडीआई (FDI) से संबंधित कुछ जानकारियां अवश्य आई होंगी जहां आपको पता चला होगा कि ऐसे कई विदेशी कंपनियां है जो कई सेक्टर में निवेश किया करती है।

आज हम विदेशी निवेश से संबंधित जानकारी ही आपको इस पोस्ट के माध्यम से देने वाले हैं जहां एफडीआई से संबंधित जानकारी के अंतर्गत आप जानेंगे कि एफडीआई क्या है और विदेशी कंपनी किन मानदंडों के आधार पर एफडीआई के तहत निवेश करती है।

आइए सबसे पहले जानते हैं कि एफडीआई का फुल फॉर्म (FDI Ka Full Form), FDI full form in Hindi क्या है।

FDI Ka Full Form in Hindi & English

FDI ka full form

एफडीआई का फुल फॉर्म फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (Foreign Direct Investment) होता है जिसे हिंदी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहा जाता है।

एफडीआई के फुल फॉर्म से आपको यह जानकारी मिल गई होगी कि इस पोस्ट के माध्यम से हम किस तरह की जानकारी आपको प्रदान करने वाले हैं।

आइए पहले एफडीआई के फुल फॉर्म की डिटेल आपको बताते हैं:-

F: Foreign (फॉरेन)

D: Direct (डायरेक्ट)

I:  Investment (इन्वेस्टमेंट)

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि एफडीआई क्या है और इसके अंतर्गत विदेशी कंपनियां किस तरह शामिल होती है और कैसे भारत देश को विदेशी कंपनियों के जरिए फंड की प्राप्ति होती है।

तो चलिए एक-एक करके इसकी संपूर्ण जानकारी आपको हम प्रदान करते हैं और सबसे पहले आपको बताते हैं कि एफडीआई क्या है।

FDI क्या है?

एफडीआई का पूरा नाम है फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यह एक तरह का विदेशी निवेश होता है जिसकी शुरुआत सन 1991 में हुई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत में एफडीआई को मंजूरी दी गई थी।

ये वह दौर था जब भारत की अर्थव्यवस्था गिरती जा रही थी जिसे मजबूत बनाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया था, जिसके अंतर्गत विदेशी कंपनियों को देश के उद्योग क्षेत्र में निवेश करने की मंजूरी दी गई हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

इसके अंतर्गत कोई भी विदेशी कंपनी दूसरे देशों के व्यवसाय क्षेत्र में निवेश कर सकती है अर्थात दूसरे देशों में स्थित बिजनेस सेक्टर में पैसा निवेश कर सकती है जिसमें कारखाने शामिल है।

हालांकि हर कंपनी के निवेश की सीमा अलग-अलग निर्धारित की जा सकती है जैसे कि कुछ सेक्टर्स में कंपनियां 100% इन्वेस्टमेंट कर सकती है वहीं कुछ सेक्टर में अलग-अलग सीमा के तहत विदेशी कंपनियों द्वारा निवेश किया जाता है। 

इसके अंतर्गत जो पॉलिसी तैयार की गई है वह विदेशी नीति के अंतर्गत कार्य करती है और जितना ज्यादा विदेशी कंपनियां अन्य देशों में निवेश करती है उस देश का विकास अधिक होता है अर्थात यदि भारत में जब विदेशी कंपनियां ज्यादा से ज्यादा एफडीआई में निवेश करेंगी तो भारत उतना ही अधिक विकासशील होगा।

यहां कुछ सीमाएं भी निर्धारित की गई हैं जैसे कि यदि कोई कंपनी एफडीआई में निवेश करना चाहती है तो निवेशक को उस कंपनी के 10% शेयर खरीदने पड़ते हैं इससे निवेशक को यह फायदा होता है कि वह दूसरे देशों में उद्योग निर्माण का कार्य कर सकता है।

यदि हम बात करें अपने भारत देश की तो यहां एफडीआई में आईटी सेक्टर के अंतर्गत अधिक निवेश किया जाता है। जैसा कि आप जानते हैं आज आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है इसलिए विदेशी कंपनियां सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश कर रही है।

आइए एफडीआई से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हम आपको अगले सेक्शन में बताते हैं।

FDI के प्रकार?

हमारे देश में दो प्रकार का एफडीआई इन्वेस्टमेंट किया जाता है जिसका नाम है – ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट।

आइए इन दोनों प्रकारों को समझने का प्रयास करते हैं:-

Green Field Investment:-

जब कोई कंपनी अन्य देशों में अपने सहायक कंपनियों का संचालन करती है और उसका प्रबंधन आदि का कार्य करती है तो इसे ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट कहा जाता है। यह पूर्ण रूप से विदेशी निवेश होता है, उदाहरण के तौर पर आप मैकडॉनल्ड्स और स्टारबक्स को ले सकते हैं, यह ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट का प्रमुख उदाहरण है।

Foreign Portfolio Investment:-

हमारे देश में दूसरा विदेशी निवेश फॉरेन पोर्टफोलियो निवेश के नाम पर किया जाता है। इसके अंतर्गत वे कंपनियां शामिल है जो अन्य देशों के कंपनी के शेयर खरीदती हैं। इसके अलावा जब कोई विदेशी कंपनी अन्य देश के बैंकों में पैसा जमा करती है तो उसे भी फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट के अंतर्गत शामिल किया जाता है जो प्रत्यक्ष रूप से निवेश होता है।

एफडीआई के लिए कुछ मानदंड भी निर्धारित किए गए हैं, आइए एफडीआई मानदंड पर भी एक नजर डालते हैं।

FDI के मानदंड क्या हैं?

यदि आप एफडीआई के बारे में जानने के लिए आए हैं तो यह जानना भी बेहद जरूरी है कि इसके लिए कौन-कौन से मानदंड बनाए गए हैं।

एफडीआई के मानदंड बहुत ही महत्वपूर्ण है जो कुछ इस प्रकार है:-

  • विदेशी कंपनी जब अपना पैसा दूसरे देश में निवेश करती है तो उनका उद्देश्य अपने मैनेजमेंट पावर को मजबूत बनाना होता है।
  • FDI निवेश उद्योग क्षेत्र में कारखानों पर लिया जा सकता है जिसके अंतर्गत कारखानों का विस्तार भी किया जा सकता है।
  • यदि किसी कंपनी को 100% स्वामित्व प्राप्त है तो वह अन्य देशों में अपनी सहायक कंपनी स्थापित कर सकती है।
  • यदि कोई कंपनी चाहे तो लंबे समय के लिए एफडीआई इन्वेस्टमेंट कर सकती है।
  • इसके प्रमुख मानदंडों में एक मानदंड यह भी है कि यदि कोई कंपनी एफडीआई में निवेश करना चाहती है तो उसे सर्वप्रथम संबंधित कंपनी के 10% शेयर खरीदने पड़ेंगे।
  • भारत के पड़ोसी देश जिनकी सीमा भारत की सीमा से लगी हुई है, यदि भारत में निवेश करते हैं तो पहले उन्हें भारत सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है।

FDI के फायदे?

अगर हम एफडीआई की बात कर रहे हैं तो यह जानना जरूरी होता है कि एफडीआई से देश की अर्थव्यवस्था को किस प्रकार का फायदा मिल रहा है और आखिर क्या वजह है जिसके कारण एफडीआई को देश में मंजूरी दी गई है।

आइए इससे मिलने वाले लाभ पर एक नजर डालते हैं:-

  • FDI में निवेश के कारण देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है जिससे देश की पूंजी में वृद्धि हो रही है और राजस्व कर में भी मुनाफा देश को मिला है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को काफी ज्यादा फायदा मिल रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि हुई है।
  • जीडीपी में वृद्धि हुई है।
  • एफडीआई के अंतर्गत जो पॉलिसी तैयार की गई है उससे अच्छी क्वालिटी के उत्पादों के लिए काफी मदद मिली है जिससे स्थानीय लोगों और उद्योगों का विकास हुआ है।
  • देश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं क्योंकि एफडीआई के अंतर्गत नौकरियां उपलब्ध हुई है।
  • विदेशी मुद्रा भंडारण में भी देश को इजाफा मिला है।

इतने फायदे एफडीआई पॉलिसी के अंतर्गत देश को मिले हैं लेकिन आपके मन में यह सवाल भी आया होगा कि क्या इससे देश को कोई नुकसान भी हो रहा है? तो चलिए एफडीआई के नुकसान की जानकारी हम आपको देते हैं।

FDI के नुकसान?

FDI से देश को निम्नलिखित नुकसान हो रहे हैं जिसे कम करके एफडीआई के फायदों को बढ़ाया जा सकता है:-

  • एफडीआई निवेश के लिए साधनों की कमी।
  • बेहतर सुविधाओं के ना होने की वजह से एफडीआई निवेश को आकर्षित करने में परेशानियां हो रही हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
  • विदेशी कंपनियों के निवेश करने से स्वदेशी निवेश को नुकसान हुआ है जिससे विदेशी निवेश का नियंत्रण देश में बढ़ता जा रहा है।
  • छोटे उद्योगों में नुकसान होने की संभावना रहती है क्योंकि विदेशी कंपनियां लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का प्रयोग करती हैं और देसी बाजारों में इन तकनीकों का उपयोग कम मात्रा में होता है।

FDI के अन्य फुल फॉर्म

FDI full form in Dentistry/DentistFédération Dentaire Internationale
FDI full form in EconomicsForeign Direct Investment
FDI full form in ShippingForeign Direct Investment
FDI full form in AgricultureForeign Direct Investment

FDI से जुड़े सवाल जवाब (FAQS)

FDI की शुरुआत कब हुई?

FDI अर्थात फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की शुरुआत 1991 में हुई थी।

एफडीआई कितने प्रकार का होता है?

एफडीआई दो प्रकार का होता है ग्रीन फील्ड इन्वेस्टमेंट और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट।

निष्कर्ष – FDI Meaning in Hindi

दोस्तों, इस पोस्ट में हमने आपको FDI की जानकारी साझा की है एफडीआई क्या है, FDI ka full form (FDI full form in Hindi & English) क्या होता है, एफडीआई के प्रकार, मानदंड, फायदे और नुकसान क्या हैं इसके बारे में डिटेल में बताया है। उम्मीद करते हैं यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी और इससे आपको एफडीआई के बारे में बहुत कुछ जानने के लिए मिला होगा।

अगर फिर भी आपके मन में कोई सवाल है तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं हम जल्द ही आपके कमेंट का रिप्लाई करने की कोशिश करेंगे। बाकी आप इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर करके दुसरे लोगो को भी FDI की सही जानकारी दे सकते हैं।

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